KGMU का नियुक्ति घोटाला: Drishtant Magazine December 2020

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भ्रष्टाचार को संरक्षण का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि लगभग डेढ़ दशक पुराने फर्ज़ीवाड़े की शिकायत पर 08 वर्ष बाद वर्ष 2012 में मंडलायुक्त स्तर पर जांच करवाई जाती है। जांच के उपरान्त समस्त आरोप सही पाए जाते हैं और आरोपियों को चिन्हित करके कार्रवाई की संस्तुति भी कर दी जाती है। तत्कालीन मंडलायुक्त की संस्तुति के बाद एकाएक संस्थान के प्रमुख की चेतना जागृत होती है। तत्कालीन मंडलायुक्त की जांच के आधार पर आरोपी व्यक्तियों के सिर्फ मंडलायुक्त ने अपनी जाँच में दोषी पाया था बल्कि हाईकोर्ट ने भी मंडलायुक्त की जांच आख्या के आधार पर आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

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